मंगलवार, 8 सितंबर 2009

manjil


  • दुनिया कहती मुझको पागल,  समझ  न कोई पाया ह
  •   जीवन की इस उठा पटक में  सबको पागल पाया है 
  •           मेरे पागल मन की व्यथा ,समझ सका न कोई कथा
  •           जीवन की इस कहासुनी में दीवाना ही समझा सबने .
  •         में कोंनहु क्या कहना है,इतनी भी अनजान नही हू
  •         जानीपहचानी राहो की राही हू.न भटकी डगर हू.
  •       आगे बढ़ना बढ़ते जाना रास मुझे हमेशा आया.
  •       जीवन की इस यंहा वंहा में, ठोर न मुझे मिल पाया 
                क्या जीवन योही  बीता  जायेगा
 , क्यामंजिल में pa jaungi. जीवन की इस aas nirash में खुद को समझ paungi.

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