- दुनिया कहती मुझको पागल, समझ न कोई पाया ह
- जीवन की इस उठा पटक में सबको पागल पाया है
- मेरे पागल मन की व्यथा ,समझ सका न कोई कथा
- जीवन की इस कहासुनी में दीवाना ही समझा सबने .
- में कोंनहु क्या कहना है,इतनी भी अनजान नही हू
- जानीपहचानी राहो की राही हू.न भटकी डगर हू.
- आगे बढ़ना बढ़ते जाना रास मुझे हमेशा आया.
- जीवन की इस यंहा वंहा में, ठोर न मुझे मिल पाया
क्या जीवन योही बीता जायेगा
, क्यामंजिल में pa jaungi. जीवन की इस aas nirash में खुद को समझ paungi.
, क्यामंजिल में pa jaungi. जीवन की इस aas nirash में खुद को समझ paungi.
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