जो कभी जगमगाया करती थी
हमारे पालन पोषण हमारे
शिक्षण के लिए जला करती थी .
घर की जरूरते ,विवाह शादी ,
सभी में सांसे उर्जावान थी.
आज नियति के हाथो अपनेको ,
सोप वो थमना चाहती थी
पास बेठे हम सांसो की गति को ,
उतार चढाव को देख रहे थे .
उनकी तकलीफों,उनको कष्टों के
मुक्ति हेतू पाठ पूजा,
प्रार्थना कर रहे थे .
हे प्रभु तकलीफों का अंत कर दे,
चाहे सांसे दे या उन्हें हर ले.
हम उनके ही सामने बेठ,
उनके महागमन की तेयारी हेतू,
कुछ विचारो को विचारो में ,
अंजाम दे रहे थे.,
शायद प्रभू ने हमारी सुन ली
उन सांसो को पूर्ण विराम दे दिया था.
मंद होती लो का प्रकाश हर लिया था.
सब समझते हुए भी हम हतप्रभ थे.
जन्मदाता की म्रत्यु पर विचलित थे.
फिर उन क्रिया कलापों को वास्तव ,
में अंजाम देने लगे ,
जिन्हें विचारो में हमने पल रखा था............
बेहतरीन लिखा है आपने.
जवाब देंहटाएंजारी रहें. शुभकामनाएं.
[उल्टा तीर]