वह आई द्वारे मेरे,हाथ पसारे उसने
,याचक बनी द्रष्टिगत होती ,आँखों में सवाल बहुतेरे.
आशा उसकी मुझसे कुछ ,कुछ उमीदें लगाई उसने,
पा जाए वह मुझसे ,चाह है जो सब उसने.
पर धन नही उसकी चाहत ,मन व्याकुल दिल था आहत,
दो बोल उसके सुन लू,दो बोलो से देदू raahat.
ये मन भी कितना अजीब है,
प्यार की कितनी प्यास इसे,
धन दौलत नही अमृत ,
समझ पाते हम काश इससे.
awesum poem aunty....
जवाब देंहटाएंbahut bhari hindi thi but mast lagi....